सूरज की रोशनी सफ़ेद दिखती है, पर असल में वह इंद्रधनुष के सारे रंगों का मेल है। जब वह हवा से होकर गुज़रती है, तो नीला रंग सबसे ज़्यादा आसमान में चारों ओर बिखर जाता है। इसलिए जब तुम ऊपर देखते हो, तो आँखों में सबसे पहले नीला आता है।
ध्यान दें'रेली स्कैटरिंग' शब्द और 'छोटी तरंगें ज़्यादा बिखरती हैं' तथ्य को छोड़ा गया है। 'नीला ज़्यादा बिखरता है' सही संक्षेप है, पर अभी प्रकाश के तरंग मॉडल को नहीं लाया। तरंग मॉडल को गहरी बातचीत के लिए बचाकर रखें।
आपके लिएसूरज की रोशनी में दृश्य स्पेक्ट्रम के सारे रंग होते हैं, और हर रंग अलग तरंगदैर्ध्य की तरंग के रूप में चलता है। जब यह रोशनी वातावरण में प्रवेश करती है, तो छोटी तरंगदैर्ध्य वाले रंग (विशेष रूप से नीला) हवा के अणुओं से टकराकर लंबी तरंगदैर्ध्य वाले रंगों से कहीं अधिक बिखरते हैं; इसे 'रेली स्कैटरिंग' कहते हैं। हमें नीला रंग दिखता है, बैंगनी नहीं (हालाँकि बैंगनी और भी अधिक बिखरता है), क्योंकि सूरज से बैंगनी कम मात्रा में निकलता है और हमारी आँखें भी उसके प्रति कम संवेदनशील हैं। एक आम भ्रांति यह है कि आसमान समुद्र का प्रतिबिंब है। असल में कारण-कार्य रिश्ता ठीक उल्टा है।